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यूपी की जिन 8 सीटों पर हो गया मतदान, उनमें किस पर कौन सी पार्टी का पलड़ा भारी, The 8 constituencies of UP are voted on, among whom, which party is overweight, read

उत्तर प्रदेश की जिन आठ लोकसभा सीट पर गुरुवार को मतदान हुआ वहां मतदान का प्रतिशत 2014 के मुकाबले में कम हुआ। मतदान के बाद जहाँ बीजेपी, कांग्रेस, सपा,बसपा और रालोद ने अपनी जीत के दावे किये हैं वहीँ ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

ज़मीनी हकीकत पर एक नज़र डालें तो आठ सीटों में से तीन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला तथा पांच सीटों पर आमने सामने का मुकाबला रहा। जिन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला रहा उनमे सहारनपुर, गाज़ियाबाद और गौतमबुद्ध नगर शामिल हैं। जिन सीटों पर आमने सामने का मुकाबला रहा उनमे मेरठ, मुज़फ्फरनगर, बागपत, कैराना और बिजनौर शामिल हैं।

जैसी कि उम्मीद की जा रही थी कि इस बार लोकसभा चुनाव में 65 से 70 फीसदी या उससे अधिक रह सकता है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार मतदान का प्रतिशत कम रहने से साफ़ है कि इस बार मतदाताओं में 2014 के चुनाव जैसा जोश नहीं था।

कहाँ कितना मतदान:

सहारनपुर 70.68 %

कैराना 62.10 %

मुजफ्फरनगर 66.66 %

बिजनौर 65.40 %

मेरठ 63.00 %

बागपत 63.90 %

गाजियाबाद 57.60 %

गौतमबुद्धनगर 60.15 %

कहाँ कौन भारी:

2014 के लोकसभा चुनाव में सभी आठ सीटें जीतने वाली बीजेपी के समक्ष इस बार अपने गढ़ बचाने की बड़ी चुनौती थी। सपा बसपा गठबंधन के अलावा कुछ सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों ने बीजेपी के लिए कड़ी चुनौती पेश की है।

सहारनपुर सीट पर कांग्रेस ने इमरान मसूद को उम्मीदवार बनाया था लेकिन बसपा ने भी मुस्लिम समुदाय से उम्मीदवार खड़ा करके बीजेपी के लिए रास्ता आसान अवश्य किया लेकिन भीम आर्मी द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद को समर्थन का एलान किये जाने के बाद इमरान मसूद मजबूत स्थति में आ गए और यहाँ शाम होते मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच हो गया।

मेरठ सीट पर भी बसपा ने हाजी याकूब कुरैशी को उम्मीदवार बनाया, इस सीट पर इकलौते मुस्लिम उम्मीदवार होने के चलते बसपा दलित और मुस्लिम कॉम्बिनेशन बनाने में कामयाब हो गयी। इस सीट पर बीजेपी ने राजेंद्र अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया तो कांग्रेस ने भी वैश्य समुदाय से हरेंद्र अग्रवाल को टिकिट देकर मुस्लिम मतों का विभाजन रोका। माना जा रहा है कि इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार हरेंद्र अग्रवाल ने बीजेपी के परम्परागत वैश्य मतदाताओं में सेंधमारी करके बीजेपी के वोट बैंक पर करारी चोट की है।

मुज़फ्फरनगर और बागपत लोसकभा सीट पर रालोद और बीजेपी में आमने सामने का मुकाबला था। बागपत सीट पर रालोद से जयंत चौधरी और मुज़फ्फरनगर सीट पर चौधरी अजीत सिंह उम्मीदवार थे। दोनों सीटों पर कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था। इसलिए दोनों सीटों पर सेकुलर मतों का विभाजन रुका साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से जाट मुस्लिम कॉम्बिनेशन देखने को मिला। दोनों ही सीटों पर रालोद की स्थति बेहद मजबूत बताई जा रही है।

बिजनौर सीट पर सुबह मुकाबला त्रिकोणीय दिखा लेकिन 12 बजे बाद बीजेपी और कांग्रेस में आमने सामने की टक्कर दिखी। इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार नसीमुद्दीन सिद्दीकी इकलोते मुस्लिम उम्मीदवार थे। बिजनौर लोकसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 35 फीसदी तक बताई जाती है। चूँकि नसीमुद्दीन सिद्दीकी कांग्रेस में शामिल होने से पहले बसपा के कद्दावर नेता थे। इसलिए बसपा कार्यकर्ताओं के साथ अपने निजी संबंधो का लाभ भी उन्हें मिला है।


राना लोकसभा सीट पर सपा ने तबस्सुम हसन को उम्मीदवार बनाया था। बीजेपी ने जाट समुदाय के प्रदीप चौधरी को उम्मीदवार बनाया तो कांग्रेस ने भी जाट समुदाय से हरेंद्र चौधरी को उम्मीदवार बनाकर बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी। इस सीट पर बीजेपी और सपा में आमने सामने की लड़ाई दिखी। बीजेपी को जहाँ जाट मतो के विभाजन से नुकसान होता दिख रहा है वहीँ सपा की तबस्सुम हसन को मुस्लिम, दलित कॉम्बिनेशन का लाभ मिल रहा है। बता दें कि कैराना लोकसभा सीट पर जाट और मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी तादाद है।

गाज़ियाबाद सीट पर भी बीजेपी की राह आसान नहीं रही। इस सीट पर सपा-बसपा गठबंधन ने सुरेश बंसल को उम्मीदवार बनाया था वहीँ कांग्रेस ने भी ब्राह्मण समुदाय से डौली शर्मा को उम्मीदवार बनाकर बीजेपी के ब्राह्मण वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की कोशिश की है। इस सीट पर जहाँ गठबंधन उम्मीदवार सुरेश बंसल को मुस्लिम, दलित समुदाय के मतदाताओं का एक बड़ा भाग मिलता दिख रहा है वहीँ वैश्य समुदाय से होने के कारण बीजेपी के परम्परागत वैश्य मदताओं में भी वे सेंधमारी करने में कामयाब रहे हैं।

गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला है। इस सीट पर जहाँ बीजेपी की तरफ से केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा उम्मीदवार हैं वह�

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