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चुनावों में भाजपा की सफलता पर ‘एग्जिट पोल का एक जैसा ही अनुमान’ BJP's success in elections is 'same opinion of exit poll'

19 मई को लोकसभा के लिए सातवें चरण का मतदान समाप्त होते ही एग्जिट पोल आने लगे। चूंकि भारत में पहली बार किसी विरोधी दल की सरकार ने अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया है, अत: लोगों में अत्यधिक जिज्ञासा थी कि क्या भाजपा नीत राजग दूसरी बार सत्ता में वापसी कर पाएगा!
हालांकि सरकार द्वारा लागू नोटबंदी और जी.एस.टी. जैसे पगों से लोगों को हुई परेशानी और बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, राफेल और बिगड़ती अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों में काफी बेचैनी थी परंतु एग्जिट पोल के नतीजों में भाजपा की चुनावी संभावनाओं पर इनका विशेष असर नजर नहीं आया।
इसी कारण विभिन्न एग्जिट पोल में भाजपा नीत राजग की सफलता की संभावना व्यक्त करते हुए इसके दूसरी बार सत्ता में आने की भविष्यवाणी की गई है तथा नितिन गडकरी ने कहा है कि ‘‘एग्जिट पोल अंतिम परिणाम नहीं हैं लेकिन भाजपा के एक बार फिर सत्ता में आने का संकेत देते हैं।’’ 
हालांकि विरोधी दल यह कह कर स्वयं को दिलासा दे रहे हैं कि अतीत में एग्जिट पोल के अनुमान गलत भी सिद्ध होते रहे हैं और ममता बनर्जी ने भी इन्हें अटकलबाजी बता कर खारिज कर दिया है, परंतु इस बार स्थिति भिन्न है क्योंकि इस बार लगभग सभी एग्जिट पोल्स ने भाजपा की बढ़त ही दिखाई है। 
एग्जिट पोल के अनुमान देखते हुए संभावना यही है कि अगली सरकार भाजपा की होगी। अत: आवश्यकता इस बात की है कि भाजपा नेतृत्व अपनी अब तक की खामियों का जायजा ले और रूठे हुए नेताओं और गठबंधन सहयोगियों को अपने साथ पक्का करके चले। 
हालांकि भाजपा नेतृत्व ने अपने सहयोगी दलों शिव सेना आदि को मना लिया है परंतु ऐसा अंतिम समय पर ही हुआ। इसके साथ ही अभी भी इसके चंद गठबंधन सहयोगी कुछ-कुछ अंदर से अनमने से हैं जिन्हें साथ रखने की जरूरत है।
इसके अलावा पार्टी में सहयोगियों द्वारा उठाए जाने वाले असहमति के स्वर सुनने की भी आवश्यकता है। उदाहरणार्थ जहां भाजपा ने सत्ता में आने पर जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा-370 समाप्त करने की बात कही है वहीं नीतीश कुमार ने धारा-370 तथा देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को कायम रखने की बात कही है।  

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